प्रेम संजोग है
प्रेम की राह आसान नहीं मित्तर । इसमें आवाज नहीं होती, इसमें जज्बात होते है । इंसान दर्पण की तरह, बस याद में होते है ।। दर्द सतह से नहीं, मन की गहराई में होते है । आंसू आंखो में नहीं, दिल में बोते है ।। त्याग और समर्पण प्रेम के अंश होते है । तुम क्या समझोगे इसमें कितने संघर्ष होते है ।। प्रेम में एक इंसान के अलावा कोई न दूजा है। ये बिना तीर्थ, मंदिर के, बस एक मन की पूजा है ।। प्रेम में त्याग है, तो कभी आशा और निराशा है । सही मायने में सच्चे प्रेम की यही परिभाषा है ।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
