शीर्षक:धीरज धरो
जहां हो वहीं अड़े रहो, घर के अंदर पड़े रहो। सूर्य मचा रहा तबाही, बन्द करो आवाजाही। बरस रही भीषण गर्मी , गजब रश्मि की बेशर्मी। कुछ दिन और धीरज धरो, हफ्ते भर तो सब्र करो। नरेंद्र सिंह 12.06.2024
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