आहत मन
जब मन आहत हो किसी की दी हुयी पीड़ा से तो वो परास्त हो जाता है स्वयं की एकांतता और समर्पित हो जाता है किसी भी अपरिचित की संवेदना वाले भावों पर बिना किसी विचार के ।!
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