कब्र का सवाल
टूट गया हूँ अंदर से , मुझे जोड़ पाओगे क्या ? बिखरे हुए हिस्से को संभाल पाओगे क्या? लौटूंगा अपना हिस्सा लेने तुम हर एक कतरा लौटा पाओगे क्या? अँधेरे में खो गया हूँ मुझे ढूँढ पाओगे क्या? मिल गया अगर तो गले से लगाकर बचा पाओगे क्या? तुझसे मोहब्बत करने की ख़ता माफ़ कर पाओगे क्या? इश्क़ में फन्ना हुआ मेरे इश्क़ पे ए'तिबार कर पाओगे क्या? जनाज़े पे अगर मेरी लाश से दीदार हुआ तो खुद से नज़र मिला पाओगे क्या? मेरे क़ब्र पर काफ़िले के बीच कफ़न पहना पाओगे क्या? कफ़न का रंग सफ़ेद से सुर्ख हुआ तो छुपा पाओगे क्या? क़ब्र पे मेरे मुश्त- ए- ख़ाक को दफ़ना पाओगे क्या? होगी तुम पहली ख़ता पर अपने हाथों से मेरे खून के निशां मिटा पाओगे क्या? बहुत रोया और खोया तेरी याद में इस याद के पन्नों को जला पाओगे क्या?
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