मात्र सेवा भाव
कभी दीये से या माचिस की तिल्ली से या मोमबत्ती से पूछकर तो देखें उसकी पीड़ा के बारे में उसकी जलन के बारे में उसके मिटते अस्तित्व के बारे में क्या बताने की स्थिति में रहते हैं ये सब, बेचारों का वजूद ही खत्म हो जाता है दूसरों की भलाई में; पर कभी सुना है लोगों के मुख से प्रकाश डालते हुए इन प्रकाश देने वाली वस्तुओं पर। ठीक इसी तरह माता-पिता अपनी संतानों के लिए अपने अरमान,शौक, अपने स्वप्न को स्वाहा कर देतें हैं सर्वस्व जवानी न्योछावर कर देते हैं पर क्या इस त्याग,बलिदान का प्रतिदान सन्तानें दे पाती हैं यही तो उन्हें सुनने को मिलता है मेरे लिए किया ही क्या है आप अपवाद की बात छोड़ दें तब। नरेंद्र सिंह 09.12.2023
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