शोर
शोर =============== शोर बहोत जादा है यहा, गावारोका, आनपढोका,...., या हाद से जादा पढे लीखे...., अनुभव हीन लाखो बेकारोका . नाजुक सी स्तीस्थि बनी हुई है, यहा काॅफी जोर आजमाईशोका, एक काफीला भरा पडा है...., यहा मृरखो के बाजारोका. दीन दौगनीचार चारचौगौनी..., यहा करकेभी क्या फायदा, जीस परीवारमे......, इज्जत के बीना पल रहे है, लाखो खावीष लिये , माॅंबापके जींदा आत्मा. ऐसी ढकोसली सौच का क्या फायदा, जो दीखावे की खातीर, नईपिढी भेज रही है माॅंबापको, आसरे के बिन वृध्द आश्रमा...., आसरे के बिन वृध्द आश्रमा. ================
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