स्त्री.... 🤵♀️
स्त्री के बारे में कागज में कोई कितना लिख पायेगा 😊✍️ क्या कोई पूरे सागर को किसी बर्तन में भर पायेगा 💕✍️ ईश्वर के घर से नारी बनकर नहीं आती है 🤵♀️ ये तो बेटी है जो हर रूप में ढल जाती है 🌹 जीवन का हर किरदार निभाती, अपनों ले लिए जान दांव पर लगाती है 💞🙏 जन्म देकर एक पुरुष को इस दुनिया में लाती है 💐 यही पुरुष क्या उस नारी को कभी समझ पाया है जिस नारी ने खुद को भूलकर हर फ़र्ज निभाया है 💐😊 हे पुरुष! क्या तुम मुझको एक बात बतलाओगे 🙏🙏 खोज रहे जो कमियां तुम स्त्री पर, क्या कभी स्त्री की तरह त्याग कर पाओगे 🙏 ये समाज सिर्फ स्त्री की खामियाँ ही ढूंढ़ पायेगा 🙏🙏 अचरज भी क्यूँ करें, जो वश में है बस उतना ही तो कर पायेगा 💐🙏💐🙏 स्त्री के बारे में कागज में कोई कितना लिख पायेगा 😊✍️ क्या कोई पूरे सागर को किसी बर्तन में भर पायेगा 💕✍️
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