बेटा-बेटी
बेटे को उसके हक़ की ज़मीन चाहिए, और बेटियों को बस मुट्ठी भर आसमान। है दोनों ही ख़ास ख़ुद में, रहते हैं सदा साथ संग में, एक साथ निभाता उम्र भर,एक धीरज बंधाती उम्र भर। ना करते होड़ एक-दूजे की, समर्पित हैं बस पूर्वजों को, एक नाम आगे बढ़ाता, एक रिश्ता संभालती। एक उम्र का सहारा बनता, एक मन का भरोसा बनती, एक वंश को चलाता, एक उसमें जीवन भरती। इक ज़मीन संभालता, इक आसमान सजाती, दोनों अपने हिस्से में, ख़ुद से दुनिया बसाते। कहने को फर्क है बहुत, मगर सच बस इतना सा, बेटा हो या बेटी, दोनों ही खुद में मुक्कमल जहाँ।
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