"बात"- सिर्फ एक शब्द
मुँह की बात तो बोली है स्पष्ट थी बात तो खोली है लाल की बात तो रोली है रंगों सी बात तो होली है .. हँसी की बात तो ढोली है कह दी बात तो कथन है पढ़ ली बात तो पठन है जला दी बात तो दहन है सह ली बात तो सहन है ..गहरी थी बात तो सघन है लोगों से बात तो चर्चा है बेकार में बात तो खर्चा है खर्चे पे बात तो निखर्चा है परीक्षा में बात तो पर्चा है .. विद्वानों से बात तो ज्ञान-चर्चा है गंदी सी बात तो दुर्वाद हैं लड़ने की बात तो वाद हे टोक दी बात तो अपवाद हैं बाद की बात तो विवाद हैं .. अच्छी सी बात तो संवाद हैं सुनी थी बात तो अफवाह है समड़ा ली बात तो वो राह हैं सपनों की बात तो वो चाह हैं दिल सी बात तो वो आह हैं ... पसंद थी बात तो वाह वाह हैं मन की बात तो विचार हैं पूछ ली बात तो साक्षात्कार हैं मानी नी बात तो इनकार हैं मान ली बात तो स्वीकार हैं ...सुनी नी बात तो बेकार हैं थोथी ही बात तो खोखली है स्पष्ट नी बात तो दोंगली है भुला दी बात तो सो चली है बोली नी बात तो वो टली है ..बोल दी बात जो सोच ली है औरौं से बात तो वार्तालाप है रौते में बात तो वो संताप है ख़ुद से बात तो पश्चाताप है घृणा में बात तो वो पाप है ..आत्मसात् ये बात तो छाप है एक ही बात तो पंक्ति है अच्छी थी बात तो उक्ति है उच्च की बात तो सूक्ति है साधन ली बात तो युक्ति है ...अंतिम थी बात तो मुक्ति है
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