पैग़ाम
मैंने लिखा कृष्ण, किसी ने अपना श्याम समझा। मैंने लिखा प्रेम, किसी ने अपना प्यार समझा। मैंने लिखे जज़्बात, किसी ने सब इकरार समझा। मैंने तो बस ख़ुद को लिखा था, जाने क्यों सबने, अपनी मोहब्बत का पैग़ाम समझा।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
