कैलाश
जाते होंगे सब शिमला-मनाली, मुझे तो कैलाश जाना है। सुकून मिलता होगा नरम-सर्द फ़िज़ाओं में, मुझे तो बस मानसरोवर में रहना है। होगी औरों को चाहत दुनिया देखने की, मुझे तो बस शिव को पाना है। औरों की चाहत होगी देश-विदेश से बंधी, मुझे तो बस त्रिशूल-डमरू थामना है।
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