मां
कभी स्नेह में निर्झर, तो कभी व्यथित होकर कभी सावन तो कभी पतझड़ बनकर मां ने हमारे लिए रोया है ! बच्चे जब भी हो विकल, चुभ जाए कभी कांटा भी अगर, दवा दुआ व मांगकर मन्नत, आपने अपना सुख चैन खोया है, टूटा जो कभी मुझ में कुछ....... हर बार आपने जोड़ा है, कभी प्यार से तो कभी फटकार से हर बार आपने हमें संजोया है हम हैं ही क्या ?....... जब भगवान ने इस सृष्टि को ही आप पर छोड़ा है।
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