माता श्री
टूटता जो मुझमें कुछ,हर बार तुमने जोड़ा है, कभी प्यार से तो कभी फटकार से, हर बार तुमने हमे सजोया है। काबिल नहीं ये दुनिया में, जो बराबरी तुम्हारी कर सके, हम हैं ही क्या? जब भगवान ने इस सृष्टि को तुम पे छोड़ा है। हां होती है तकलीफ़ कभी कभी , तुम्हारी कड़वी बातों से मालूम है हमे हमारे लिए तुमने , हज़ार बार खुद का दिल तोड़ा है। न जाने कितने सपने सजाए थे तुमने खुद के लिए, कभी खुद के लिए कुछ न कर, हमारे लिए कतरा कतरा जोड़ा है। डर जाता हैं डर भी, तुम्हारे सामने आकर, हिम्मत नहीं मुझे ले जाने को यमराज की भी दम जो अपना मैंने,तुम्हारी बाहों में तोड़ा है।
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