ममता
बीज को सहलाकर सीजा कुछ इस तरह कि नाजों से पालने वाला पौधा खिलकर बना खूबसूरत सा फूल। हर तूफान से वो डटकर लड़ गया मा के आशीर्वाद का समर्थन लिए, ना कभी कोई कमी महसूस हुई और न एक पल का भी ईमान डोला। आँखें मूंद कर जो चल पड़ा मा के मार्गदर्शन पर, तो कभी चट्टानों की चोटी छू गया तो कभी समुद्र की गहराइयों में डुबकी लगा जाए। गिरकर भी सम्भल जय ऐसी शक्ति है इस प्यार में।
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