महामना
महामना आपकी कीर्ति अमर है आपके विनम्रता त्याग से बना उपवन आज चहूँओर गुंजित है पुष्प फलित फूलित सुगंधित हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय आपके सपनों की एक बगिया भारतीयता में रचा बसा प्रांगण राष्ट्र प्रेम साधना में समर्पण। मानवीय मूल्यों की धरा मनवता सिद्धि की कला गीता जिसके कण कण में आत्म शक्ति भरे जन जन में। मुझे गर्व है कि मैं आपकी बगिया का एक पुष्प आपके अदृश्य आशीर्वाद से सिंचित खोज पाया मैं अपने जीने की राह। आज आप और प्रासंगिक हैं विश्व को आज आपकी जरूरत इस नकारात्मकता भरे संसार को आपके प्रवचन की पुकार है । आपको जन्म दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। प्रणाम।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
