शक्ति
शुरूदय के किरणों से सूर्यास्त के अंधेरे तक छाई है एक अटूट ताकत; बल हो या छल, हर आपत्ति का पल में निकाले सॉल्यूशन; समझ ना इसको कम यारो, ये स्त्री है, अपने पर उतरी तो पहाड़ क्या संसार को उठा ले आपने छोटी उंगली पर।
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