"तुम्हारी आवारगी का सच"
तुमने मुझे आवारा कहा था, जो मैं नहीं था। तुमने मुझे नीच भी कहा था, जो मैं नहीं था। तुमने मुझे बेवफ़ा और हरजाई भी कहा था, बहुत आसानी से तुमने सारे इल्ज़ाम लगाए थे। आज अपने दामन में झाँक कर देखना, तुम कितने कमज़ोर थे, सत्य तुमसे कितना अछूता था। अब इन सारे तोहमतों के हक़दार तुम हो। कहो, तुम्हारी आवारगी और नीचता तुम्हारे अंतर्मन को कितना तोड़ती होगी, तुम्हारी बेवफ़ाई और हरजाईपन मुझे कितना तोड़ता होगा। जब अपने प्यार को सही मोड़ न दे सको, जब अपने प्यार को प्यार से जोड़ न सको, तो सारे तोहमत खुद ओढ़ लेना। समय न तुम्हारा इंतज़ार करेगा, न मेरा। अब तुम्हारे दामन में न कलियाँ हैं, न कोई फूल। ठहर कर देखना और सोचना— कि तुम कितने आवारा थे, कि तुम कितने नीच थे, और तुम्हारी बेवफ़ाई ने कैसे एक इंसान को इंसान नहीं रहने दिया। धन्यवाद 🙏🙏 अमरेंद्र कर्ण
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
