"मन में उतर जाना "
मैं तुझे कई बार रोकना चाहा, राह चलते तुझे टोकना चाहा। बहुत आसान नहीं था प्यार का निमंत्रण देना, और बहुत साफ़गोई से तुम्हारे मन में उतर जाना। प्यार का इज़हार जब करना चाहा, अनुबंध में तुझे जब बाँधना चाहा। बहुत आसान नहीं था तुम्हारे अंतरंग को टटोलना, और बहुत साफ़गोई से तुम्हारे दिल में घर बना लेना। जब तुम्हारे अनछुए बदन को छूना चाहा, प्यार से तुम्हारे अंतःस्थल में समाना चाहा। बहुत आसान नहीं था इन बातों को तुमसे मनवा लेना, और बहुत साफ़गोई से तुम्हारे जन्मों-जन्मों का हो जाना। धन्यवाद 🙏🙏 अमरेंद्र कर्ण......
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