पहली नजर का जादू
उससे मिली पहली नज़र, जैसे ठहर गया हो सफ़र, आवाज़ दे रहा ना जाने क्यों, उस संग बीता हर एक पहर, वो आई जैसे बारिश बनकर, भीगे मन के सूखे अंदर, उसकी बातें चाँदनी जैसी, उसकी हँसी लगी समंदर,, मैं चल पड़ा फिर उसके पीछे, जीवन के हसीं पल चुराने, उसकी आँखों के आईने में, लगने लगे सपने सुहाने ना जाने कैसा जादू था वो, ना जाने कैसी बात थी, भीड़ भरी इस दुनिया में जैसे, वो ही मेरी सौगात थी,, आज भी जब यादें आती हैं, धड़कन हृदय में मुस्काती है, एकांत में भी करे शोर बड़ा, मुझे नई दुनिया ले जाती है। वो उसका इठलाना, वो शर्माना, हर बात पर नया बहाना, धीरे से मुस्काकर यूँ देखना, दिल का हर राज़ चुरा जाना,, आज भी वैसी है या बदल गई, वक़्त के संग शायद संभल गई, ये घड़ी की टिक-टिक केसी हुई , दबी हुई यादें फिर मचल गई....! ✍️नितिन कुवादे...
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