प्रिय सखी
एक सुख दुख की साथी हैं जो मेरे हर बदलते मौसम में डटकर खड़ी रहती; बरसात में आंसू पूछे, गर्मी में मेरे जलते दिल पर बर्फ छिड़कर तापमान नीचे लाई मेरे सर्दी की खिलखिलाती हंसी उसी के कान में चहकती है; गुनगुनके लिख दिया है मैने उसका नाम दिल के आजाद पत्ते पर उसका नाम हमेशा के लिए।
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