ख्वाबों की इश्क
यूं इम्तिहान न ले मेरी मोहब्बत का हर रात तुम, अगर इश्क़ है तो कह दो, यूं ख़ामोशी में न जलाओ तुम। सपनों में आके हँसती हो, बाहों में समा जाती हो, फिर सुबह होते ही क्यों मेरी नींद चुरा जाती हो। मैं ख़्वाबों में तेरे संग चाँदनी रातें जी लेता हूँ, तू एक सदा लगाती है… और मैं टूट के जी उठता हूँ। आज ही की तो बात है, सीने से तुझे लगाया था, तेरी कॉल ने क्या किया… वो सपना भी बिखराया था। यूँ ज़ुल्म न कर ऐ सनम, ये दिल पहले ही तन्हा है, अब नींद भी रूठ गई तो जीना कितना मुश्किल है। तू चाहे तो मेरी रातों को फिर से उजाला कर दे, या फिर साफ़ कह दे मुझसे… मेरा किस्सा रुख़्सत कर दे। हम इश्क़ में डूबे बैठे हैं, तू फैसला कर दे आज, या अपना बना ले मुझको… या कर दे दिल को बर्बाद।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
