"विश्वास का घर"
तुम्हें जिस चीज़ से गुरेज़ हो, बता देना, दिल के एक कोने में विश्वास का घर बना लेना। हम और तुम मुसाफ़िर हैं जिन्हें एक दिन रुकना ही है, बस यही सोचकर अपने कदम बढ़ा लेना। वक़्त कभी विपरीत नहीं होता, हर वक़्त को अपना वक़्त बना लेना। एक रंजिश अपनी ज़िंदगी से, और कई रंजिशें मुझसे कर लेना। भूलना हमारी फ़ितरत है, तुम अपना वह अतीत भूलकर, फिर से अपना घर बसा लेना। किसी का किसी से जन्मों का रिश्ता नहीं होता, रिश्तों की इस नुमाइश में, एक रिश्ता अपने लिए बना लेना। तुम सुनो मन की गहराई से, मन क्षुब्ध हो तो उसे प्रेम का कोई गीत सुना देना। मैं मर्म जानता हूँ तुम्हारे टूटने और बिखरने का, अगर कुछ गलत हो, तो मुझसे अपनी नाराज़गी जता देना। धन्यवाद 🙏🙏🙏🙏 अमरेंद्र कर्ण
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