गझल : हम तुम्हारी सुदरता की
हम तुम्हारी सुंदरता की, कदर करते है और हम तेरे विचारो पे सदैव, बने रहते है... कोई ऐसी बात हो मेरे खातीर आपसे की वो चाहत आपसे ही, सजने लगते है... जन्नत आपसे ही सजी हुई रहती है सनम तेरी मोहब्बत की डोरी हमसे, बने रहते है... मन से हर बात को दबी हुई क्यू रहते हो ये चाहत के पनाह मे हम, सपने सजते है... लोभ न धन का न कोई सत्ता का हमे बस तुम्हारे प्यार के, तराने बुनते है... धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२
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