सपनों का राजकुमार
ना घोड़े पर सवार और ना ही कोई बड़ा धमाका, वो जिंदगी में आया ऐसे रोज का ही मेहमान हो जैसे; आकर समा गया मेरे जहन में हर पल सुनहरा कर के कि उसके बिना हर पल बेबसी में उसका इंतज़ार में निकला जब तक उसके हाथ में अपना हाथ ना थमा दिया।
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