आँखें
किनारे ढूंढने वाले भटकते ही रहे दर-दर, जो डूबे वो बताते हैं, रिहाई है आँखों में। जो डरते रहे लहरों से, वो साहिल तक ना पहुंचे, जिन्होंने डूबना सीखा वो बताते हैं, गहराई है आँखों में। किसी ने पूछी राहें, किसी ने मांगे उजाले, जो खुद में खो गए वो बताते हैं, सच्चाई है आँखों में। ये दुनिया बस तमाशा है, यहाँ सब भागते फिरते, जो ठहर कर देख ले वो बताते हैं, सुकून है आँखों में। ना ढूंढो अब किनारों को, ना मंज़िल की फ़िक्र रखो, जो बहते साथ धारा के वो बताते हैं,खुदाई है आँखों में। जो टूटे फिर भी हँसते हैं, वो राज़ समझ जाते हैं, हर बिखराव के बाद ही नई बनावट है आँखों में। जो छोड़ आए कल को, और आज में ही जीते हैं, वो कहते हैं सुकून की असली ठहराव है आँखों में। कभी दर्द भी आईना है, कभी ख़ामोशी कहानी, जो पढ़ ले इन लम्हों को, वही रौशनी है आँखों में। ना शब्दों की ज़रूरत है, ना आवाज़ों का सहारा, जो महसूस कर सके दिल से, वही बंदगी है आँखों में।
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