खुद
कुछ पल जिंदगी के साथ बिताने का सोचा तो होगा, यूंही नहीं खुद से खुद को कई बार टोका होगा। काटने को तो कट जाए दिन,महीने, अरसा भी, पर कटे न वो रात जिसमें आंसुओं को रोका होगा। वैसे तो हज़ार राहगीर मिलेंगे तुम्हे तुम्हारे जीवन में, मगर जो साथ चले साया बन ऐसा कहा कभी सच होगा। जितना सोचते हो जिंदगी में, जीवन उतना आसान नहीं, चट्टानों से लड़ती बहती जो, किनारों ने थामा उसका हाथ होगा। अंधेरी रात का सहारा तो जुगनू भी थे चमकते तारे भी, फिर भी लड़ना तुमको अकेले ही घनघोर बादलों के साथ होगा। इतना तो है ज्ञान तुम्हे, तो फिर क्यों बिखर जाते हो, इन हवाओं को क्या खबर, तकिए ने खुदको कितना भिगोया होगा। बेखबर है जिंदगी तुम्हारे इन जिलत्ती हालातों से, क्या पता तुमने अपने एहसासो को अज्ञात शव की तरह कैसे रखा होगा। खामखां घबराते हो तुम इन लहरों,तूफानों से, 'जहर तुम्हारे अपनों ने अपने मन में भर कर रखा होगा।
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