ग़लती मेरी है
एक तरफ़ा मोहब्बत भी अजीब इम्तिहान है, हँसते हुए चेहरे के पीछे छुपा तूफ़ान है। मान लिया कि पहली नज़र में दिल हारना ग़लती मेरी है, पर हर बार उसी राह से गुज़रना भी तो ज़िद मेरी है। तुमने मुस्कुरा कर जो हाल पूछा था कभी, उसे उम्र भर की कहानी समझ लेना ग़लती मेरी है। तुमने दोस्त कहा, मैंने दुआओं में नाम लिया, रिश्ते को ख़्वाबों से सजाना ग़लती मेरी है। तुम्हारी हर छोटी बात को इशारा मान बैठा, खामोशी को भी इकरार समझना ग़लती मेरी है। अब भी जब सामने से गुज़रती हो बेख़बर, नज़रें झुका न पाना ग़लती मेरी है। यार कहते हैं छोड़ दे उसे, भूल जा सब, पर एक ही नाम पे ठहर जाना ग़लती मेरी है। वो शायद कभी मेरी थी ही नहीं, फिर भी उसे अपना मान लेना ग़लती मेरी है। और अगर मोहब्बत में सज़ा मिलती है, तो ये सज़ा भी हँसकर कबूल करना ग़लती मेरी है।
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