इंसान
अगर मौका मिला तो मैं कागज पर एक दास्तान लिखूंगा। मजबूत कंधों के पीछे थका हुआ इंसान लिखूंगा। अगर मौका मिला तो कागज पर एक दास्तान लिखूंगा। वो जो मुस्कुरा कर कहता है सब ठीक है उसके पीछे का तूफान लिखूंगा। लिखूंगा कर्ज में दबे हुए उसके भाव फिर लड़खड़ाती उसकी जुबान लिखूंगा। अगर मौका मिला तो मैं कागज पर एक दास्तान लिखूंगा। लिखूंगा उसकी वो रातें जो उसने सिसकियों में गवाई है। गवाही में तकिए के सारे बयान लिखूंगा। अगर मौका मिला तो मैं कागज पर एक दास्तान लिखूंगा। अगर मैं लिख पाया तो लिखूंगा उसके अंदर का मौन उसमें छिपा हुआ वो इंसान लिखूंगा। अगर मौका मिला तो मैं कागज पर एक दास्तान लिखूंगा। मजबूत कंधों के पीछे थका हुआ इंसान लिखूंगा।
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