प्रिये.. 🌸
मैं शहर का शोर शराबा, तू गांव जैसी शांत प्रिये ! मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई, तू सुलझी हुई सी बात प्रिये ! मैं दोपहर की चिकचिक, तू सुकून भरा रात प्रिये ! मैं दूरियों का पैमाना, तू हसीन मुलाकात प्रिये ! मैं इश्क. सीखने का आदी, तू इश्क. की पूरी जात प्रिये ! मैं बिखरा हुआ सा जवाब तेरा, तू सिमटा हुआ सवालात प्रिये ! मैं थोडा अलग इस दुनिया से, मगर मिलते हैं तुझसे खयालात प्रिये ! मैं कागज. पर गिरी स्याही, तू तराशा हुआ जज्बात प्रिये !
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