अंत
ये राग द्वेष लोभ मोह कब तक जब तक जिंदगी है और अपनी जिंदगी कब तक इसकी खोज अभी जारी है । ये आपाधापी ये संचय ये तनाव कब तक ये संघर्ष ये प्रयास कब तक जब तक सांसें हैं और सांसें कब तक बस आखिरी साँस तक । किसने क्या किया हासिल इस अप्रत्याशित जीवन में जान लगा कर खूब बटोरा अंत में मुट्ठी खाली है । इस नश्वर जीवन में क्या क्या न सीखा और किया अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए नैतिक अनैतिक न विचार किया । गिद्धों की तरह नोचा जाएगा जाने के बाद सुतों द्वारा संपत्ति बंटवारे पर संघर्ष होगा आपके समर्पण का न कद्र होगा। संतानों के लिए अर्जन बस माया है और माया रोकती है सार्थक जीवन से परोपकार सेवा आध्यात्म और धर्म से कष्ट रहित शानदार संतुष्ट मृत्यु से ।
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