कुछ अनजान भी अपने से बन जाते ह
कुछ अनजान भी अपने से बन जाते है__मीनू पाण्डेय 🧸 चलते चलते राहों में कुछ लोग मिल जाते है बातों से दिलो से विचारों से भाते है जानते नहीं कुछ खाश उन्हें धीरे धीरे जान पहचान बनाते है बातों से हंसाते है अगर गलती से रुलाते है तो मनाने की सौ तरकीब अपना ते है और सच मानो दिल के करीब आ जाते है वादे कसमें बड़े आजमाते है खुद को दुनिया से अलग बताते है जाने नहीं देते दूर हमें मरने की कसमें सौ बार दे जाते है हाय नए नए रिश्तों में कितना कुछ आजमाते है अहमियत पाकर हमे झुका दिया खुद को राजा जैसा बना लिया चलते चलते अब हसने की वजह नहीं देते रोने पे आंसु की वजह नहीं सुनते बदलने की वजह नहीं कहते खुद के मन को भटकने की आदि है कहते दो पल के रिश्ते को कसमो वादों में तोल देते है मानसिक संतुलन सही नहीं था बोल देते है ईश्वर से डरते नहीं खुद को ईश्वर में तोल देते है
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