एहसास.. 🌸
मैं कविता नहीं एहसास लिख रहा हूँ आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ जब मैं तुमसे मिला. तुम अलग सी लगी हम रोज. मिलने लगे. फिर दूर हो गए आज तुमसे मिलने की आस लिख रहा हूँ तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ अजनबी से तुम पहचान बन गयी पहचान बढ़ते बढ़ते जान बन गयी मेरी जान तुमको जीने की प्यास लिख रहा हूँ तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ तेरे आने-जाने से मैं यूँ शायर बना शब्द कागज़ पे कैसे बैठते. पता ही नहीं अपने सीने में दबी साँस लिख रहा हूँ सच तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
