प्रभु
प्रभ ========================== जीना तेरी दुनियामे........, आसान थोडा ही है, प्रभु माया का जाल यहा, हर रात सबेरे की प्रतिक्षा मे है. क्या खुब रचा यहा तुने, प्रेम भवर का गौता, ईंन्सान का जीवन.... , तेरे सास बिना , एक हवा झोका है. प्रभु क्या सही मे.... रचीयता और लेखन..., यहा आलग है....., !. तभी तो तु....... ..., यहा तारणहार होकर भी, धरतीवर तेरी किस्मत ..., लिखने वाला कोई और है, कोई और है. =================
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