परिपाटी
मुर्गे कटते हैं बकरे कटते हैं अब बंदर भी मारे जाएंगे शाही फरमान आया है मानव को बन्दरों से बचाना है। बेचारे बन्दर ! मनुष्यों के दुश्मन बने स्वयं बेबस है परेशान हैं पर इंसानों के लिए संकट बने। जनसंख्या वृद्धि का अधिकार मनुष्यों का है प्राकृतिक संपदा पर अधिकार मानव का है ये कौन हैं अपने हिस्से का संसार मांगने वाले छतों मुहल्लों सड़कों पर अपना अस्तित्व ढूंढने वाले। इन तुच्छ पशुओं की ये मजाल ये करेंगे हमसे तकरार गाय बन्दर कुत्ते अब जीना हराम किए चुन-चुन कर करना होगा इनका नरसंहार । ये परिपाटी ऐसे ही चलती रहेगी दिन दूर नहीं जब दुश्मनों की संख्या बढ़ेगी आज पशुओं से तकलीफ हो रही मानव को कल बेवस निस्सहाय वृद्ध मानव भी काटे जाएंगे। अस्तित्व की लड़ाई में हिंसा सर्वोच्च धर्म है अपनी जरूरतों के लिए हत्याएं परम न्याय है भले भारत में राम बुद्ध गांधी अनेकों हो मगर आज थालियों में निस्सहाय के लोथरे सजते हैं ।
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