सबक... ग़ज़ल
हर लम्हा ज़िंदगी का कोई सबक दिए जा रहा है, वक़्त चुपचाप हमें बहुत कुछ सिखाए जा रहा है। कभी ठोकरों में छुपी होती है मंज़िल की राह, कभी दर्द ही हमें जीना सिखाए जा रहा है। जो अपने थे वही आईना बनकर सामने आए, हर चेहरा असली रंग दिखाए जा रहा है। कल तक जो ख़्वाब थे आँखों की रोशनी बनकर, आज वही हमें हक़ीक़त समझाए जा रहा है। हम समझते रहे किस्मत को बस एक खेल, मगर हर मोड़ पे कोई राज़ खुलता जा रहा है। मक़्ता: जस्सी, ये सफ़र-ए-ज़िंदगी भी अजीब सा है, हर गिरना हमें और संभलना सिखाए जा रहा है।...✍️ Jaswinder chahal
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