ईश्वर
कितनी बार देखा ईश्वर कभी मां के रूप में हाथ में भोजन लेकर कभी पिता के रूप में कष्ट सहकर कभी शिक्षक के रूप में तो कभी बहन के रूप में कभी दोस्त के रूप में और कभी अजनबी के रूप में और कभी एक सलाहकार के रूप में कभी कभी लगता है इन सभी लोगों में से कोई ना कोई तो होगा ईश्वर और इतने रुप तो किसी ने ना देखे चाहे करे वो वर्षो तक करें तप और अब नहीं खोजना ईश्वर जो रहता है हमेशा मेरे साथ कभी साथी तो कभी बन राहगुजर
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