लौट आना
याद है तुझे, मैंने कहा था कभी— तुझे जहाँ जाना हो, जा, तुझे जिसके साथ जाना हो, जा, मुझे फर्क नहीं पड़ता… क्योंकि मोहब्बत में रोकना नहीं आता मुझे, मैंने हमेशा तुझे आज़ाद ही चाहा है, तेरी खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढी है, चाहे उसमें मेरा होना ज़रूरी ना रहा हो… पर एक बात याद रखना, जब कभी थक जाए तेरे कदम, जब लगे कि अब नहीं रहना उस सफ़र में, जहाँ दिल तेरा अब नहीं बसता… जब भीड़ में भी तुझे तन्हाई सताए, जब किसी के साथ होकर भी तू खुद को अधूरा पाए, जब रातों में खामोशी तुझसे सवाल करे, और जवाब में बस मेरा नाम आए… तो लौट आना, बिना किसी सवाल के, बिना किसी डर के। मैं यहीं मिलूँगा, तेरा इंतज़ार करते हुए, उसी मोड़ पर… वक़्त शायद बदल जाए, लोग शायद बदल जाएँ, पर मेरा दिल वहीं ठहरा रहेगा, जहाँ तू मुझे छोड़ कर गया था… और जब तू आएगा, मैं तुझे अपने गले से लगाकर तेरे हर आँसू को चुप करा दूँगा, तेरे हर दर्द को अपना बना लूँगा… ना कोई शिकवा होगा, ना कोई गिला, बस एक सुकून होगा उस पल में, कि तू लौट आया है… और मैं फिर से तुझे वैसे ही चाहूँगा, जैसे पहली दफ़ा चाहा था— बेखौफ, बेहिसाब, और बिना किसी शर्त के… ✨
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