भोलेनाथ
श्रद्धा बहुत है मेरी भोलेनाथ में सब कुछ थमा देते हैं वो मेरे हाथ में मैं तो भूल जाता हूं उन्हें अक्सर मगर वह हर वक्त खड़े रहते हैं मेरे साथ में श्रद्धा बहुत है मेरी भोलेनाथ में... डमरू की धुन पर भी जिनका नृत्य कमाल है। इस धरा पर जो सबसे विशाल हैं वो मेरे महाकाल है वो मेरे महाकाल है। अब कुछ नहीं दिखता मुझे किसी ओर की बात में श्रद्धा बहुत है मेरी भोलेनाथ में तो भूल जाता हूं उन्हें अक्सर श्रद्धा बहुत है मेरी भोलेनाथ में मगर वह हर वक्त खड़े रहते हैं मेरे साथ में...... Sandip Rohilla
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