मुझे नहीं पता था…
मुझे नहीं पता था, कि अपने देश के एक आर्मी जवान से प्रेम इतना गहरा, इतना खूबसूरत होगा… वो जो भीड़ में भी अकेला चलता है, जिसकी मुस्कान में भी एक राज़ पलता है, जिसकी आँखों में देश बसता है, और दिल में सिर्फ़ फ़र्ज़ रहता है… मुझे नहीं पता था, कि उसका हर “मैं ठीक हूँ” एक झूठ होगा, और हर खामोशी के पीछे एक अधूरी कहानी छुपी होगी… वो रातों को जागता है, पर सपने नहीं देखता, वो ज़िंदगी जीता है, पर अपने लिए नहीं… मुझे नहीं पता था, कि उसका प्यार भी देशभक्ति से कम होगा, वो मुझे चाहेगा, पर देश से ज़्यादा नहीं… फिर भी, उसके हर खत में, हर खामोशी में, मुझे अपना नाम सुनाई देता है, और गर्व होता है— कि मेरा प्यार, इस देश की हिफ़ाज़त करता है… मुझे नहीं पता था, कि एक आर्मी जवान से प्रेम इतना दर्दभरा, फिर भी इतना खूबसूरत होगा…
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