पाथेय
जिंदगी के खट्टे मीठे अनुभवों से भावनाओं का पिटारा भरा पड़ा है फूट पड़ता है हृदय का बाँध देखो जब कोई याद या बात चुभता है। मुश्किल बहुत है खुद को सम्भाले रखना पर जज़्बात कब कहां सम्भाले संभलते हैं लाख कोशिश कर लो छुपाने की पर साहब ये चुपके से अवसर देख अनचाहे बहते ही है । परन्तु हम कौन है एक खास जिम्मेदारी लिए परपीड़ाओं का हरण किए युवा खुशहाली का कौशल लिए। हम सिखाते हैं कौशल तो पहले खुद सीखना होगा अपने पीड़ाओं का उपचार हर सम्भव जल्दी करना होगा। स्व जागरूकता और देखभाल पहले हमें ही अपनाना होगा अपने जज़्बातों का प्रबंधन सबसे पहले हमें ही करना होगा।
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