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Lag rha phir se koi kuchh lene aaya hai लगेगा क्यों नहीं ,वो फिर से आया है एक बार दिल चुराने जैसे सांसों में छुप कर अपने प्यार को पाने बे-परवाह रहता हूं थोड़ा, कब किस रस्ते तुम मिलोगे खैर- ओ-ख़बर नहीं क्यूं न अब दिल मचलेगा अपने दिल रुबा को पाने
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