u
Lag rha phir se koi kuchh lene aaya hai लगेगा क्यों नहीं ,वो फिर से आया है एक बार दिल चुराने जैसे सांसों में छुप कर अपने प्यार को पाने बे-परवाह रहता हूं मैं थोड़ा, कब किस रस्ते तुम मिलोगे इसकी भी खैर-ओ-ख़बर नहीं क्यूं न अब दिल मचलेगा अपने दिल रुबा को पाने
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
