tera sath
माली तू मेरे बगीया की प्रियतम तू अपने पिया की बड़े प्रेम से घर सीच रही मेरी बग्घी भी खीच रही चाह है सब अर्पित कर दू खुशियों से आंचल भर दू रहना संग बस साथ मेरे ले लो जो भी है पास मेरे दे दूं तुझे सारे धन क्या बाट सकूंगा अंतर्मन युद्ध में तुम हार गई मेरी थकान भाप गई सम्मान मुझे बहुत दिया जब तक तेरे संग जिया प्रेम मुझसे करे है अनंत निराश मन करती जीवंत तो प्रश्न यही पर आता है अंतर्मन क्यों तू छुपाता है कुछ धुंधले कुछ साफ चित्र अनेक दुश्मन कुछ है मित्र न चाहे भी करता हूं जीवन नीड भरता हूं
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