sukun- e- jindgi
दिल के घावों को यूँ ना कुरेद ऐ दोस्त, हम भी दिल में खुदा रखते हैं। वो मेरा ना हुआ तो क्या, पर हम हर इबादत में उसकी वफा रखते हैं। हम जिंदगी की कस्मकस में यूँ ही दूर नहीं हुए उनसे, उनसे दूर होने में भी उनकी रजा रखते हैं। ✍️✍️by -sraj❣️❣️
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
