shut up
अब तो वफाएं भी क्या करनी और खताएं भी क्या करनी जो पूरी ही न हो सकीं वो ख़ाहिशें भी क्या करनी । वो तो हो गया जो चाहा नहीं जो चाहा वो हुआ नहीं हर बार नाकाम कोशिशें भी क्या करनी , बस चराग़ ऐ उम्मीद जो हवाओं का शिकार की वो आयेगा ही ,भी , खैर ये गुंजाइशें भी क्या करनी । एक बात थी जो उसने कही फिर वहीं बात मैने कही पर हक में तो तुमने कहा ही नहीं तो तुमसे गुज़रिशें भी क्या करनी , अब तो शिकस्त लिए है दिल मगर कसक एक बात की कहूं क्या सुनी जाएगी छोड़ो इसकी सिफारिशें भी क्या करनी। दीपज्योति।
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