सिरसक:, सुनs मगहिया
मगही सभे बोलs, मगही में मुँह खोलs, परेम रस घोलs, एकरे पर करs गुमान हो। सुनs सुनs मगहिया।। ई हम्मनी के मईया, मुँह खोलबईया, हे लाज रखबईया, एकरा समझs महान हो। सुनs सुनs मगहिया।। पुरनकी ई भासा हे, सभे के अभिलासा हे, एकरा में मिठासा हे, एकरे बुझ सांस परान हो। सुनs सुनs मगहिया।। मगही के अछा हाल हल,एकर राज बिसाल हल, एकर सुनहरा काल हल,एकरे में मिले गयान हो। सुनs सुनs मगहिया।। मगही के सान बढ़ाबs , पूरनका दिन लौटाबs, मगही के गुन बड़ी गाबs, करs मगही के उथान हो। सुनs सुनs मगहिया।। सुनs सुनs मगहिया, सभे गुनs मगहिया। एकरे से बढ़तो तोरा मान हो, सुनs सुनs मगहिया।। नरेंद्र सिंह, मोहनपुर,अतरी, गया 19.04.2025
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
