पेड़ बचाबs
हम्मरा काट-काट के ठुठ तू कइलs, बुरा हाल बनइलs। एकरो से जादा दुरगत होतो तोरा, जे हम्मरा छछनइलs।। तङप-तङप के मरबs जीव सभे, सांस ला तरस जइबs। अइसने नीच करनिया के चलते, एकदिन सभे पछतइबs।। जेतना बना लs महल-अटारी बड़का, एक दिन होतो बीरान। बना लs सड़क सहर काट के हम्मरा बनतो सभे असमसान।। ई अप्प्पन चाल सुधारs जलदी रुख बरीख सभे लगाबs। पेड़ नै काटे के खा लs अब किरिया, एकरा ला अलख जगाबs।। पेड़ के सभे मानs देवी-देवता जे बरम्हा विसनु महेस। लगाबs बचाबs अउ पूजs पेड़, अब करs सीरी गनेस।। नरेंद्र सिंह. अतरी गया 13.04.2025
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