जल बचावs
होतो खतम पानी जखनी, त सोचs का होतो तखनी। रुख बिरीख सभे जलतो, जीव जंन्तु भी नैय पलतो।। सभे छछन छछन के मरवs, तखनी धन के का करवs। चेत जा सभे मरद जनानी, सभे बचावs बून-बून पानी।। जे चाहs हs रहे ला आबाद, भूजल के नै करs बरबाद। छत के पानी डालs धरती में, पनसोखा बनावs तू परती में।। पानी हे अनमोल धन रतन, एकरा बचावे के होवे जतन। पानी के कम करs परयोग, तभिए बचे के बनतो संजोग।। नरेंद्र के मानs सभे बतिया, नै तो पिटवs सभे छतिया। पानी बिन सभे कुछ हऊ सुना, सुनले टिंकू,रिंकू,पिंकू मुना।। नरेन्द्र सिंह, 22.03.2025
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