सुनs मगहिया
सुनs मगहिया हो भाय, मगही अप्पन दिल में रखिहs। अप्पन भासा बोल के, एकर नममा ऊंचा करिहs।। जने जने तू जा बसs, खाटी मगही वहां बोलिहs। चाहे विदेश जा रहs, मधुर रस मगही के घोलिहs।। ई भासा हे बड़ बेस, सन्देह नैय तनिको धरिहs। बेधड़क बेझिझक सभे, मगही में ही बतिया करिहs।।गाना गीत औ कविता, कवि लोग मगहिये में लिखिहs। पहनावा रहे जइसन, मगही पुत बोली में दिखिहs।। अप्पन माय बोली के, सगर बहुते गुनगान करिहs। सुनs मगहिया हो भाय, मगही के इज्जतिया रखिहs।। नरेंद्र सिंह, अतरी, गया)
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
