ठंढवा से बचs
आझ देखलs कोहरा जे पड़ लो , आझ से केतना ठंडक हो बढ़लो। संक्रांति तक ले नञ मिलतो राहत, बुढबन ला समझs अइलो ई आफत। सभे बाहर घरे से कम ही निकलिहs, कनमा,नकिया के भी तोपले रहिहs। ठंड से बचे के अब सभे करs उपाय, गरम कपड़ा से देह सभे ढकs भाय। चौक ,दलान,गली में अलाव जलाबs, बोरसी और हीटर से ई ठंड भगाबs। ठंड लहर से नञ मज़ाक कोय करिहs अइसन में अप्पन धयान सभे धरिहs। "नरेंद्र" कह रह लो हे तो बतिया मानहु, मनबढू नियन तनीको नञ तू करहूs। नरेंद्र सिंह 29.12.2023
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